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EPFO keeps interest rate at 8.5% for 2020-21

सरकार की रिटायरमेंट फंड संस्था ईपीएफओ ने गुरुवार को ऐलान किया कि प्रोविडेंट फंड (PF) में जमा रकम पर अब सालाना 8.5 परसेंट के हिसाब से ब्याज मिलेगा. देश के तकरीबन 5 करोड़ जमाकर्ता इस ब्याज दर का लाभ उठा सकेंगे. इसे बड़ी खुशखबरी इसलिए माना जा रहा है क्योंकि कोरोना को देखते हुए ऐसा अनुमान जताया गया था कि सरकार पीएफ पर ब्याज दर को घटा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

ईपीएफ से जुड़ा कामकाज सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज यानी कि CBT देखती है. सीबीटी ने ही पीएफ पर 8.5 परसेंट ब्याज देने की सिफारिश की है. अब इस ऐलान पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी. सबसे पहले सीबीटी की सिफारिश को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा. वहां से हरी झंडी मिलने के बाद मौजूदा वित्तीय वर्ष में ईपीएफओ के जमाकर्ताओं के खाते में 8.5 परसेंट के हिसाब से ब्याज मिलना शुरू हो जाएगा. उससे पहले इस निर्णय को सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा जिसके बाद ही ईपीएफओ नई दर पर ब्याज देना शुरू करेगा.

कोरोना काल में पीएफ पर 8.5 परसेंट की ब्याज दर लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लोग तो यह मान कर चल रहे थे कि जिस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था महामारी में चरमराई है, उसका असर पीएफ पर दिख सकता है. किंतु सरकार ने ऐसा नहीं किया.
सरकार के पास है फंड
सवाल है कि इस रेट पर ब्याज देने के लिए क्या ईपीएफओ के पास पर्याप्त फंड है? इसका जवाब EPFO के केई रघुनाथन में समाचार एजेसी PTI को दिया है. रघुनाथ ने कहा कि ब्याज के लिए फंड की कोई कमी नहीं है क्योंकि ईपीएफओ ने इस काम के लिए 300 करोड़ रुपये सरप्लस रखा है. 8.5 परसेंट की दर से पीएफ पर ब्याज देने के लिए यह रकम पर्याप्त है. रकम की यह बात मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए कही गई है.

जमा राशि पर कमाई करने के लिए पीएफ को सबसे उपयुक्त जरिया माना जाता है. अच्छी दर पर ब्याज और टैक्स छूट को देखते हुए लोग इसमें बेधड़क निवेश करते हैं. ढाई लाख रुपये तक की जमा राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता. लेकिन इस बार के बजट में कुछ बदलाव किए गए हैं और अब यह राशि टैक्स के दायरे में आ गई है. हालांकि इस ब्रैकेट में वेतनभोगी लोगों की तादाद काफी कम है. इसलिए बहुत ऊंची सैलरी वालों पर ही इसका असर देखा जाएगा. सरकार ने इस बारे में अपनी राय पहले ही स्पष्ट कर दी है.

राहत की खबर
कोरोना काल में पीएफ पर 8.5 परसेंट की ब्याज दर लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लोग तो यह मान कर चल रहे थे कि जिस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था महामारी में चरमराई है, उसका असर पीएफ पर दिख सकता है. किंतु सरकार ने ऐसा नहीं किया और 8.5 परसेंट पर पीएफ को बनाए रखने का ऐलान कर दिया. लेकिन यह राहत वैसे लोगों को असंतोष भरी लग रही होगी जिन्होंने अपने जमाने में 8.8 परसेंट तक का ब्याज पाया है. यह दौर बहुत पहले का नहीं है बल्कि बात कुछ बरस पहले की ही है.

पहले क्या थी ब्याज दर
पिछले साल मार्च की बात करें तो सरकार ने सात साल से सबसे कम रेट पर ब्याज देने का ऐलान किया था. 2019-20 में 8.5 परसेंट ब्याज देने का फैसला हुआ जो कि 2018-19 के 8.65 परसेंट से कम था. 2019-20 की ब्याज दर 2012-13 के बाद सबसे कम थी. आंकड़े देखें तो 2016-17 में 8.65 परसेंट, 2017-18 में 8.55 परसेंट ब्याद दिया गया था. हालांकि 2015-16 में सरकार ने इसमें बड़ा बदलाव किया और दर को 8.8 परसेंट पर पहुंचा दिया.

इससे भी पहले की बात करें तो 2013-14 में 8.75 परसेंट, 2014-15 में भी इस दर को कायम रखा गया, जबकि 2012-13 में यह दर 8.5 परसेंट में थी. ईपीएफओ ने 2012-13 में 8.5 परसेंट के हिसाब से ब्याज दिया था. उससे पहले 2011-12 में यह दर 8.25 परसेंट थी.

किसे होगा फायदा
इस साल से पीएफ में एक नई बात ये जुड़ने जा रही है कि अब कांट्रेक्ट कर्मचारियों के लिए भी पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जा रही हैं. 1 अप्रैल से नया वेज कोड लागू हो रहा है. इसमें श्रम कानूनों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. नए नियम के मुताबिक अब सैलरी स्ट्रक्चर भी बदलने जा रहा है. अलाउंस अब सैलरी से 50 परसेंट से ज्यादा नहीं हो सकता. इससे सीटीसी पर बड़ा असर दिखेगा. नए नियम के मुताबिक सैलरी का ज्यादा पैसा अब पीएफ और ग्रेच्युटी में जमा होगा जिसे सामाजिक सुरक्षा के हिसाब से बेहद अच्छा माना जा रहा है. अब आपके पीएफ अकाउंट में ज्यादा पैसा जुड़ेगा जो रिटायरमेंट के बाद के लिए लाभदायक होगा.

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